हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, गुलिस्तान शहर में “मुफ़लेहून” फेस्टिवल मनाया गया, जिसकी थीम थी “अच्छाई का हुक्म देना और बुराई से रोकना” और रोज़गार, घर, प्रोडक्शन में खुशहाली और फ़ैमिली सिस्टम को मज़बूत करना।
आयतुल्लाह सय्यद काज़िम नूर मुफ़ीदी ने इस सेरेमनी में इस धार्मिक फ़र्ज़ के बड़े दायरे पर ज़ोर दिया और कहा: “अम्र बिल मारूफ़ व नही अनिल मुंकर” का दायरा सीमित नहीं होना चाहिए।
उन्होंने कहा: “यह इलाही आदेश किसी खास ग्रुप या प्रदर्शन की एक्टिविटी तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि, अम्र बिल मारूफ़ व नही अनिल मुंकर, इसे एक पब्लिक कल्चर के रूप में बढ़ावा दिया जाना चाहिए ताकि समाज का हर व्यक्ति अपनी क्षमता और ज़िम्मेदारी के अनुसार इसे लागू करने में हिस्सा ले सके।”
गुलिस्तान में सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि ने धार्मिक मूल्यों को बढ़ावा देने में बोलचाल और व्यवहार के तालमेल पर भी ज़ोर दिया, और कहा: “अगर हमारा संदेश अच्छाई के बारे में है, तो हमारा व्यवहार भी उसके अनुसार होना चाहिए, क्योंकि बोलचाल और व्यवहार को कभी एक-दूसरे से अलग नहीं किया जाना चाहिए।”
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